उत्तराखंड: इलाज के लिए पहाड़ से मैदान तक भटकती रही गर्भवती महिला, जुड़वा बच्चों समेत मौत; तीन जिलों की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

उत्तराखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर किए जा रहे दावों के बीच अल्मोड़ा जिले के सल्ट क्षेत्र से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इनोलू गांव निवासी गर्भवती महिला निशा और उसके गर्भ में पल रहे जुड़वा बच्चों की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि निशा को समय पर समुचित उपचार नहीं मिल सका और बेहतर इलाज की तलाश में परिवार को पहाड़ से मैदान तक कई अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़े। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है।

जानकारी के अनुसार सल्ट क्षेत्र के इनोलू गांव निवासी निशा को अचानक सांस लेने में परेशानी होने लगी। तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे उपचार के लिए रामनगर लेकर पहुंचे। बताया गया कि 31 अगस्त को रामनगर अस्पताल पहुंचने के बाद चिकित्सकों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर उपचार के लिए हायर सेंटर हल्द्वानी रेफर कर दिया।

इसके बाद परिजन निशा को लेकर हल्द्वानी और काशीपुर के विभिन्न सरकारी एवं निजी अस्पतालों में उपचार की तलाश में भटकते रहे। परिजनों के मुताबिक इस दौरान निशा की हालत लगातार गंभीर होती गई। आखिरकार 2 सितंबर को उसे काशीपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां चिकित्सकों ने उसकी स्थिति को गंभीर बताया। उपचार के दौरान निशा की हालत और बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई।

बताया गया कि चिकित्सकों ने ऑपरेशन के जरिए निशा के गर्भ में पल रहे जुड़वा बच्चों को बाहर निकाला। परिजनों के अनुसार, इनमें से एक बच्चे की पहले ही मौत हो चुकी थी, जबकि दूसरे ने भी कुछ समय बाद दम तोड़ दिया। एक साथ तीन जिंदगियों के चले जाने से परिवार गहरे सदमे में है।

निशा के ससुर ने घटना को स्वास्थ्य व्यवस्था की विफलता से जोड़ते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यदि निशा को समय रहते उचित अस्पताल और समुचित उपचार मिल जाता तो शायद स्थिति अलग हो सकती थी। उन्होंने उत्तराखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता, रेफरल व्यवस्था और गंभीर मरीजों को समय पर विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।

12 दिन बाद सामने आया मामला, तीन जिलों की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

घटना के करीब 12 दिन बाद मामला सामने आने से भी स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। निशा के उपचार से जुड़ी परिस्थितियों में अल्मोड़ा, नैनीताल और ऊधम सिंह नगर—तीन जिलों की स्वास्थ्य व्यवस्था सामने आती है।

निशा अल्मोड़ा जिले के सल्ट क्षेत्र के इनोलू गांव की रहने वाली थी। रामनगर और हल्द्वानी नैनीताल जिले में हैं, जबकि उपचार के दौरान वह काशीपुर पहुंची, जो ऊधम सिंह नगर जिले में आता है। ऐसे में यह मामला केवल किसी एक अस्पताल या जिले तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि पर्वतीय क्षेत्रों से मैदानी इलाकों तक गंभीर मरीजों को समय पर विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराने की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

विशेषकर गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों के लिए समय पर उपचार, प्रभावी रेफरल व्यवस्था, एंबुलेंस सुविधा तथा हायर सेंटर तक सुरक्षित और त्वरित पहुंच सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती बनी हुई है।

अब सवाल यह है कि निशा को समय पर बेहतर उपचार क्यों नहीं मिल सका और इलाज के लिए उसे एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक क्यों ले जाना पड़ा। स्वास्थ्य विभाग की जांच में यदि मामले की जांच होती है तो यह स्पष्ट होना जरूरी होगा कि उपचार के दौरान किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा और कहीं किसी स्तर पर लापरवाही या व्यवस्था संबंधी कमी तो नहीं रही। जांच के बाद ही इस मामले में वास्तविक जिम्मेदारी तय हो सकेगी।