उत्तराखंड: हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी शिफ्ट करने के प्रस्ताव को चुनौती देने वाली याचिका खारिज।

मीडिया ग्रुप, 10 सितम्बर, 2026

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट कॉम्प्लेक्स को नैनीताल से हल्द्वानी शिफ्ट करने के प्रस्ताव को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की। कोर्ट ने कहा कि यह रिट याचिका समय से पहले दायर की गई थी क्योंकि मामला अभी ज़मीन की पहचान करने के चरण में है। कोर्ट ने कहा कि जब वन भूमि को डी-रिज़र्व करने या उसे गैर-वन उद्देश्य के लिए इस्तेमाल करने का चरण आएगा, तब वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 की धारा 2 के तहत केंद्र सरकार की पूर्व मंज़ूरी की आवश्यकता होगी।

जस्टिस मनोज कुमार तिवारी और जस्टिस पंकज पुरोहित की डिवीज़न बेंच उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें नैनीताल के ज़िला मजिस्ट्रेट के 14 मई 2026 के आदेश (हाईकोर्ट कॉम्प्लेक्स को शिफ्ट करने के लिए ज़मीन की पहचान से संबंधित) और 19 जून 2026 के फुल कोर्ट रिज़ॉल्यूशन को चुनौती दी गई। प्रस्तावित जगह रुद्रपुर के तराई-सेंट्रल वन डिवीज़न में बेल बाबा मंदिर के पास लगभग 73 हेक्टेयर वन भूमि है।

याचिकाकर्ता का तर्क था कि प्रस्तावित निर्माण एक गैर-साइट-विशिष्ट/गैर-वन उद्देश्य है और इसलिए, वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980, वन संरक्षण नियम, 2023 और 29 दिसंबर 2023 के समेकित दिशानिर्देशों और स्पष्टीकरणों का पालन किए बिना वन भूमि को डायवर्ट या इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, क्योंकि केंद्र सरकार की ज़रूरी पूर्व मंज़ूरी नहीं ली गई। यह भी कहा गया कि प्रस्तावित जगह महत्वपूर्ण पारिस्थितिक महत्व वाले क्षेत्र में आती है और पहचाने गए हाथी गलियारों (elephant corridors) का हिस्सा है, जिसे डायवर्ट करना पर्यावरण की रक्षा के संवैधानिक दायित्व के खिलाफ होगा।

राज्य ने कहा कि शिफ्टिंग की प्रक्रिया अभी केवल ज़मीन की पहचान के चरण में है और ज़रूरी मंज़ूरी और क्लीयरेंस सही समय पर केंद्र सरकार और क्षेत्रीय अधिकार प्राप्त समिति (Regional Empowered Committee) से प्राप्त किए जाएंगे। एडवोकेट जनरल ने यह भी कहा कि प्रस्तावित ज़मीन कथित हाथी गलियारे से लगभग 10 किलोमीटर दूर है।

Case Title: Raman Kumar Shah v. High Court of Uttarakhand & Ors. [Writ Petition (M/B) No. 656 of 2026]