डिजिटल डेस्क। बिना मोबाइल नंबर साझा किए चैट करने की अनुमति देने वाले व्हाट्सएप के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर से धोखाधड़ी और नकली पहचान की चिंताएं व्यक्त की गई हैं, लिहाजा सरकार इसकी जांच कर रही है।
सरकार ने इस मामले में व्हाट्सएप की मूल कंपनी मेटा को नोटिस जारी करके तीन दिनों में विस्तृत स्पष्टीकरण दाखिल करने का निर्देश दिया है।
सरकारी सूत्रों ने कहा कि यह फीचर यूजर्स को असली एजेंसियों, संगठनों या लोगों जैसे यूजरनेम अपनाने की अनुमति दे सकता है, जिससे पहचान बदलकर धोखाधड़ी की जा सकती है। जिससे जन सुरक्षा और समाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
सूत्रों ने कहा कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा या जन सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगी। एक सूत्र ने कहा कि सरकार को खुद को आश्वस्त करना होगा कि इस फीचर से कोई खतरा नहीं है, क्योंकि इसके बारे में चिंताएं जायज हैं।
अधिकारी जांच करेंगे कि क्या फीचर पर रोक लगाने के लिए कानूनी नियम हैं। अगर व्हाट्सएप का जवाब संतोषजनक नहीं हुआ, तो सरकार इस फीचर पर रोक लगा सकती है।
पेटीएम के संस्थापक व सीईओ विजय शेखर शर्मा ने भी चेताया कि अगर ठीक से सुरक्षित नहीं किया गया तो एक जैसे दिखने वाले यूजरनेम नकल और घोटालों का एक बड़ा जरिया बन सकते हैं।
विजय शेखर शर्मा ने कहा, ‘जल्द ही आपके पास व्हाट्सएप पर एक वेरिफाइड यूजरनेम होगा और फिर एक जैसे लगने वाले अनवेरिफाइड यूजरनेम होंगे…जो बदले में…।’
नाटडेटिंग के सह-संस्थापक व सीईओ जसवीर सिंह ने भी खतरों की बात कही और एक इंटरनेट मीडिया पोस्ट में लिखा, ‘निजता मायने रखती है।’
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
