मनन कुमार मिश्रा के इस्तीफे की उठती मांग पर नालसार छात्रों के एनरोलमेंट पर रोक का फैसला BCI ने लिया वापस, मनन मिश्रा के नेतृत्व पर उठे सवाल

मीडिया ग्रुप, 14 अगस्त, 2026

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद के 2026 बैच के छात्रों के अधिवक्ता के रूप में एनरोलमेंट पर रोक लगाने संबंधी अपने पूर्व निर्देश को वापस ले लिया है। BCI के इस फैसले के बाद नालसार के छात्रों के अधिवक्ता के रूप में एनरोलमेंट का रास्ता साफ हो गया है। मामला उस समय विवादों में आया जब नालसार विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत को आमंत्रित किए जाने के विरोध से जुड़े विवाद के बीच BCI ने 2026 बैच के छात्रों के एनरोलमेंट पर रोक लगाने का निर्देश दिया।

इस निर्णय की कानूनी और राजनीतिक स्तर पर व्यापक आलोचना हुई। विभिन्न राजनीतिक दलों, अधिवक्ताओं, कानून के छात्रों और सामाजिक संगठनों ने BCI की कार्रवाई पर सवाल उठाए तथा BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा की भूमिका और निर्णय प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े किए। मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने भी BCI के हस्तक्षेप पर सवाल उठाते हुए इसे छात्रों और विश्वविद्यालय के बीच का विषय बताया।

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने BCI के तत्कालीन आदेश को लेकर BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि Bar Council of India वकीलों की एक स्वतंत्र वैधानिक संस्था है, किसी राजनीतिक दल का प्रकोष्ठ नहीं। उन्होंने कहा कि छात्रों के विरोध अथवा असहमति के कारण उनके पूरे पेशेवर भविष्य को प्रभावित करना किसी भी लोकतांत्रिक और विधिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है, इस पूरे प्रकरण की नैतिक जिम्मेदारी BCI अध्यक्ष को लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने BCI के आदेश की कड़ी आलोचना की। उन्होंने BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा को लिखे पत्र में पूरे 2026 बैच के एनरोलमेंट पर रोक लगाने के निर्देश को “illegal”, “disproportionate” और “fundamentally unsustainable” बताया। उनका कहना था कि किसी छात्र के खिलाफ व्यक्तिगत रूप से कोई दोष सिद्ध हुए बिना पूरे बैच को दंडित करना न्यायसंगत नहीं हो सकता। उन्होंने इस कार्रवाई को कानून के छात्रों को उनके अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के प्रयोग के लिए डराने धमकाने जैसा बताया और कहा कि विश्वविद्यालय स्वतंत्र विचार, बहस और असहमति के स्थान होने चाहिए। SCBA की ओर से तत्काल आदेश वापस लेकर 2026 बैच के छात्रों को बिना बाधा एनरोलमेंट का अवसर देने की मांग की गई थी।

कॉक्रेज जनता पार्टी (CJP) ने इस मामले को और अधिक आक्रामक तरीके से उठाया। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर मनन कुमार मिश्रा की भूमिका पर सवाल उठाते हुए यह मुद्दा उठाया कि क्या अब BCI अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग की जानी चाहिए। इसके बाद CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने सीधे तौर पर मनन कुमार मिश्रा से इस्तीफा देने की मांग की और इसे उनकी नैतिक जिम्मेदारी बताया।

कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम सहित विपक्ष के नेताओं ने BCI के कदम की आलोचना करते हुए इसे छात्रों के अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संदर्भ में गंभीर विषय बताया। विवाद का राजनीतिक पहलू इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा स्वयं राज्यसभा के सदस्य हैं और उनके राजनीतिक संबंधों को लेकर भी सार्वजनिक बहस शुरू हुई।

इस पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई रही। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने BCI की कार्रवाई पर कड़ी असहमति व्यक्त की और सवाल उठाया कि छात्रों और विश्वविद्यालय के बीच के इस मामले में BCI को हस्तक्षेप करने का अधिकार किस आधार पर है। न्यायालय ने छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध और अभिव्यक्ति के अधिकार को गंभीरता से लिया।

इसके बाद BCI ने अपने पूर्व निर्देश को वापस लेते हुए स्पष्ट किया कि NALSAR के 2026 बैच के छात्रों को उनके भविष्य के लिए सामूहिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा। BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के अनुसार, वरिष्ठ अधिवक्ताओं, बार के सदस्यों, कानून के छात्रों तथा समाज के जागरूक नागरिकों से प्राप्त प्रतिक्रियाओं पर विचार करने के बाद परिषद इस निष्कर्ष पर पहुंची कि नालसार के 2026 बैच के छात्रों की इस पूरे विवाद में कोई भूमिका नहीं थी। इसलिए छात्रों के विरुद्ध आगे किसी कार्रवाई की आवश्यकता नहीं है और कार्यवाही बंद कर दी गई है।