गदरपुर। सिख मिशनरी कॉलेज लुधियाना की गदरपुर इकाई की ओर से अमर शहीद बाबा बंदा सिंह बहादुर के जन्मदिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान आर्थिक रूप से कमजोर 25 जरूरतमंद परिवारों को खाद्य सामग्री वितरित की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ पालिकाध्यक्ष मनोज गुंबर, गुरु नानक पब्लिक स्कूल के प्रबंधक सुरेंद्र सिंह ग्रोवर और समाजसेवी जगजीत सिंह ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम गुरु नानक पब्लिक स्कूल, गदरपुर के परिसर में आयोजित हुआ।
इस अवसर पर पालिकाध्यक्ष मनोज गुंबर ने कहा कि बाबा बंदा सिंह बहादुर ने जुल्म के खिलाफ आवाज उठाकर लोगों की रक्षा की। उनका योगदान सदैव स्मरणीय और प्रेरणादायक रहेगा। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की सहायता करना भी पुनीत कार्य है, जिससे जरूरतमंद लोगों को बेहतर जीवन जीने में मदद मिलती है।
कार्यक्रम के आयोजक देवेंद्र सिंह ने बाबा बंदा सिंह बहादुर के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उनका पूर्व नाम लक्ष्मण दास था। शिकार के दौरान एक मादा हिरण और उसके बच्चों की मृत्यु की घटना से उनके मन में वैराग्य उत्पन्न हुआ और उन्होंने साधु जीवन अपना लिया। बाद में वे माधो दास के नाम से जाने गए और महाराष्ट्र के क्षेत्र में गोदावरी नदी के किनारे आश्रम बनाकर रहने लगे।
उन्होंने बताया कि गुरु गोविंद सिंह जी से भेंट के बाद माधो दास ने अमृत छककर बंदा सिंह बहादुर नाम धारण किया। गुरु गोविंद सिंह जी ने उन्हें पंजाब की धरती पर अत्याचार के खिलाफ संघर्ष करने की प्रेरणा दी। इसके बाद बंदा सिंह बहादुर ने अत्याचारी शासन के विरुद्ध संघर्ष किया और सरहिंद के सूबेदार वजीर खान के खिलाफ कार्रवाई कर गुरु गोविंद सिंह जी के छोटे साहिबजादों की शहादत का बदला लिया।
देवेंद्र सिंह ने बताया कि बंदा सिंह बहादुर ने धर्म परिवर्तन के दबाव के बावजूद अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और वीरतापूर्वक शहादत दी। उन्होंने सभी से उनके जन्मदिवस पर उनके आदर्शों को अपनाने और जरूरतमंदों की सहायता करने की अपील की। कार्यक्रम के दौरान खाद्य सामग्री प्राप्त करने वाली वृद्ध महिलाओं ने आयोजक टीम को आशीर्वाद देते हुए आभार व्यक्त किया।
इस मौके पर मनोज गुंबर, जगजीत सिंह, किशोर कुमार गुंबर, आकाश कोचर, भूपेंद्र कौर, परमजीत कौर, भूपेंद्र कौर गाबा सहित जगवती, रामवती, नीलम, पूजा, मिंदर कौर, रागनी, राबिया, पार्वती, नारायणी, सायरा, सुनीता, सुंदर देवी, निशा, विमलेश, विमला, धर्मावती, मूर्ति, सावित्री, रामादेवी, प्रकाश कौर और तारो देवी आदि मौजूद रहे।



