संविधान हत्या दिवस पर लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान, आपातकाल को बताया लोकतंत्र पर हमला

रुद्रपुर। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय आह्वान पर गुरुवार को नगर निगम सभागार में संविधान हत्या दिवस के अवसर पर प्रदर्शनी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आपातकाल के दौरान हुए घटनाक्रम, लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष और उस दौर की परिस्थितियों को प्रदर्शनी के माध्यम से दर्शाया गया।

इस अवसर पर आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोकतंत्र सेनानियों एवं उनके परिजनों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सांसद अजय भट्ट ने किया। भाजपा पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वालों को नमन किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद अजय भट्ट ने कहा कि 25 जून 1975 भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक काला अध्याय है। आपातकाल केवल राजनीतिक विरोधियों को दबाने का प्रयास नहीं था, बल्कि यह संविधान की मूल भावना, नागरिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा प्रहार था। उन्होंने कहा कि उस दौरान नागरिकों के मौलिक अधिकारों को समाप्त कर दिया गया, प्रेस की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाए गए और विरोध की आवाज उठाने वालों को जेलों में बंद किया गया।

उन्होंने कहा कि लाखों निर्दोष लोगों को गिरफ्तार किया गया तथा लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवाज उठाने वाले नागरिकों और नेताओं को यातनाएं सहनी पड़ीं। इसके बावजूद लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले लोगों ने संघर्ष जारी रखा और अंततः लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत हुई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर संविधान हत्या दिवस मनाया जा रहा है ताकि नई पीढ़ी उस दौर की वास्तविकताओं को समझ सके।

कार्यक्रम संयोजक एवं महापौर विकास शर्मा ने कहा कि आपातकाल सत्ता के अहंकार और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का उदाहरण है। उस समय विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और पत्रकारों तक को जेलों में बंद किया गया तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करने का प्रयास हुआ। उन्होंने कहा कि मीडिया पर सेंसरशिप लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर बड़ा हमला था। संविधान हत्या दिवस केवल इतिहास को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए सदैव सजग रहने का संदेश भी है।

भाजपा जिलाध्यक्ष कमल जिंदल ने कहा कि आपातकाल के कठिन दौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भारतीय जनसंघ सहित अनेक संगठनों और लोकतंत्र समर्थकों ने बड़ा संघर्ष किया। हजारों कार्यकर्ताओं ने जेलों में यातनाएं सहन कीं, लेकिन लोकतंत्र की रक्षा के संकल्प से पीछे नहीं हटे। वर्ष 1977 में जनता ने अपने मताधिकार के माध्यम से लोकतंत्र की पुनर्स्थापना कर यह साबित किया कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है।

विधायक शिव अरोरा ने कहा कि आपातकाल भारतीय संविधान पर लगा ऐसा कलंक था जिसने लोकतांत्रिक व्यवस्था को गहरी चोट पहुंचाई। उन्होंने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को स्वतंत्रता और अधिकार प्रदान करता है, लेकिन आपातकाल के दौरान इन्हीं अधिकारों को समाप्त करने का प्रयास किया गया था। भारतीय जनता पार्टी लोकतांत्रिक परंपराओं, संवैधानिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए सदैव प्रतिबद्ध रही है।

कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानियों एवं उनके परिजनों को सम्मानित किया गया। साथ ही दर्जा राज्य मंत्री उत्तम दत्ता, जिला महामंत्री तरुण दत्ता, वेद ठुकराल, सुनील ठुकराल, पारस चुघ, विजय तोमर, धीरेन्द्र मिश्रा, हिमांशु शुक्ला, अक्षय अरोड़ा, मुकेश पाल, विवेक दीप सिंह, सुनील सिंह, रोशन अरोड़ा, योगेश वर्मा, धर्म सिंह कोहली सहित बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।