रुद्रपुर। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए आरक्षित सीट पर प्रवेश दिलाने में फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। गदरपुर के एक कारोबारी पर अपने बेटे का निजी विद्यालय में आरटीई के तहत दाखिला कराने के लिए फर्जी आय प्रमाणपत्र तैयार कर गरीब होने का लाभ लेने का आरोप है।
जानकारी के अनुसार, कारोबारी ने अपनी आय निर्धारित सीमा के भीतर दर्शाते हुए आय प्रमाणपत्र शिक्षा विभाग में प्रस्तुत किया था। इसी आधार पर उसके बेटे को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए आरक्षित सीट पर प्रवेश दे दिया गया। छात्र लंबे समय से विद्यालय में पढ़ाई कर रहा था और उसकी फीस का भुगतान सरकार आरटीई योजना के तहत कर रही थी।
मामले का खुलासा तब हुआ जब खंड शिक्षा अधिकारी के पास इस प्रवेश को लेकर शिकायत पहुंची। शिकायत के बाद शिक्षा विभाग ने संबंधित आय प्रमाणपत्र का तहसील प्रशासन से सत्यापन कराया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आय प्रमाणपत्र कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बनवाया गया था।
अब विभाग यह भी जांच कर रहा है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रवेश कैसे स्वीकृत हुआ और सरकारी धन का भुगतान इतने समय तक कैसे जारी रहा। अधिकारियों का मानना है कि इस कार्रवाई के बाद आरटीई के अन्य संदिग्ध प्रवेश मामलों की भी जांच तेज की जा सकती है।
तहसीलदार कार्यालय ने संबंधित आय प्रमाणपत्र को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। शिक्षा विभाग अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद छात्र का आरटीई के तहत मिला प्रवेश निरस्त किया जाएगा। साथ ही विद्यालय को अब तक आरटीई मद में दी गई सरकारी धनराशि की वसूली संबंधित पक्ष से किए जाने की भी कार्रवाई की जाएगी।
