उत्तराखंड हाई कोर्ट ने दिए चेक बाउंस के मुकदमों में तेजी लाने के लिए सम्मन की तामीली व्हाट्सएप और ईमेल से कराने के निर्देश
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने चेक बाउंस मामलों में समन को इलेक्ट्रॉनिक तरीकों, जिसमें ई-मेल और WhatsApp शामिल हैं, के ज़रिए भेजने की इजाज़त दी। 5 जनवरी, 2026 को जारी एक सर्कुलर में कोर्ट ने राज्य भर की क्रिमिनल अदालतों को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 (NI Act) के तहत मामलों को संभालते समय इन इलेक्ट्रॉनिक तरीकों का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया। ये निर्देश चेक बाउंस मामलों में देरी को कम करने के लिए भारत के सुप्रीम कोर्ट के हालिया दिशानिर्देशों के अनुसार जारी किए गए।
यह उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य में चेक बाउंस के मामलों को तेजी से निपटाने के लिए नए और व्यापक दिशा-निर्देश हैं। रजिस्ट्रार जनरल योगेश कुमार गुप्ता की ओर से जारी सर्कुलर में आधुनिक तकनीक के उपयोग और अदालती प्रक्रिया को सरल बनाने पर जोर दिया गया है।
कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अब चेक बाउंस के मामलों में समन भेजने के लिए केवल पारंपरिक तरीकों पर निर्भर नहीं रहा जाएगा। उत्तराखंड इलेक्ट्रॉनिक प्रोसेस रूल्स 2025 के तहत अब ई-मेल, मोबाइल नंबर और व्हाट्सएप जैसे मैसेजिंग एप्लिकेशन के जरिये भी समन भेजे जा सकेंगे। शिकायतकर्ता को शिकायत दर्ज करते समय आरोपी का ई-मेल और व्हाट्सएप विवरण देना लिए एक शपथपत्र भी देना अनिवार्य होगा जिसकी सत्यता के होगा।
कोर्ट ने आरोपियों को शुरुआती चरण में ही राहत देने के लिए ऑनलाइन भुगतान का विकल्प पेश किया है। समन में अब स्पष्ट रूप से ऑनलाइन भुगतान का विकल्प और लिंक दिया जाएगा। आरोपी सीएनआर नंबर या केस क्रेडेंशियल्स दर्ज कर सीधे चेक की राशि जमा कर सकेगा।
यदि आरोपी इस सुविधा के जरिये भुगतान कर देता है तो न्यायालय मामले को आपसी सुलह (कंपाउंडिंग) के आधार पर बंद कर सकेगा। कोर्ट ने यह दिशा-निर्देश सुप्रीम कोर्ट की ओर से हाल में संजाबीज तरी बनाम किशोर एस. बारकर मामले में दिए गए फैसले के अनुपालन में जारी किए हैं।
कोर्ट ने कहा है कि यदि शिकायतकर्ता की ओर से आरोपी के संपर्क विवरण, ई-मेल या व्हाट्सएप, के संबंध में दिया गया शपथपत्र गलत पाया जाता है, तो कोर्ट सख्त कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा।
