SC/ST एक्ट में झूठी रिपोर्ट लिखाने के आरोप में दो अलग-अलग मामलों में 5 और 3 साल की सजा का आदेश।

मीडिया ग्रुप, 12 दिसंबर, 2025

एससी एसटी एक्ट के दुरुपयोग पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए झूठी रिपोर्ट लिखाने के दो अलग अलग मामलों में सजा का आदेश दिया है। राजधानी लखनऊ की SC-ST स्पेशल कोर्ट ने जमीन विवाद में फर्जी तरीके से अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराने वाले युवक विकास कुमार को पांच साल कैद और दस हजार रुपए जुर्माना की सजा सुनाई है। कोर्ट ने इसे कानून के घोर दुरुपयोग का मामला मानते हुए कड़ी कार्रवाई की है।

जानकारी के अनुसार, विकास कुमार ने 29 जून 2019 को पीजीआई थाना में जमीन विवाद को लेकर फर्जी एफआईआर दर्ज कराई थी। इस एफआईआर में ओमशंकर यादव, नीतू यादव और अन्य दो लोग आरोपी बनाए गए थे। विवेचना में तत्कालीन सीओ बीनू सिंह ने पाया कि घटना पूरी तरह झूठी थी। किसी भी आरोपी की घटनास्थल पर लोकेशन नहीं मिली और जांच से यह स्पष्ट हुआ कि जमीन के विवाद के कारण एससी/एसटी एक्ट के तहत फर्जी FIR दर्ज कराई गई थी।

SC-ST स्पेशल कोर्ट ने फर्जी मुकदमा दर्ज कराने को गंभीर अपराध मानते हुए विकास कुमार को पांच साल की सजा सुनाई और 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर झूठे मुकदमे के एवज में उसे कोई राहत राशि मिली हो तो उसे तुरंत वापस लिया जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि झूठी एफआईआर के मामलों में कानूनी कार्रवाई किसी भी स्थिति में टाली नहीं जाएगी।

ऐसे ही एक अन्य मामले में भी विगत राजधानी लखनऊ की SC-ST स्पेशल कोर्ट ने जमीन विवाद में फर्जी तरीके से अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराने वाली शकुंतला देवी को तीन वर्ष कैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने इसे कानून के घोर दुरुपयोग का मामला मानते हुए कड़ी कार्रवाई की है।

दरअसल, वजीरगंज थाना क्षेत्र में रहने वाली शकुंतला देवी ने 2 फरवरी 2024 को अहमद, हसीबुल रहमान, अमिताभ तिवारी, तारा बाजपेई, वशिष्ठ तिवारी सहित कई लोगों के खिलाफ मारपीट, धमकी और SC-ST एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया था।

आरोप था कि इन लोगों ने उनके साथ जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी। कोर्ट ने जांच में झूठ मुकदमा दर्ज कराना पाया जिस पर
कोर्ट ने इसे कानून के घोर दुरुपयोग का मामला मानते हुए कड़ी कार्रवाई करते हुए सजा का आदेश दिया है।