माता-पिता के जीवित रहते दादा-दादी की संपत्ति पर पोते-पोतियों का हक नहीं : हाईकोर्ट

मीडिया ग्रुप, 15 सितंबर, 2025

हाईकोर्ट ने पैतृक संपत्ति विवाद के एक मामले में बेहद महत्वपूर्ण फैसला देते हुए याचिकाकर्ता महिला को करारा झटका दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि पोता या पोती अपने माता-पिता के जीवित रहते दादा-दादी की संपत्ति में हिस्सेदारी के लिए दावा नहीं कर सकते। जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव की बेंच ने यह फैसला सुनाया है।

हाईकोर्ट ने अपने इस आदेश के साथ याचिकाकर्ता कृतिका जैन की याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसने अपने पिता राकेश जैन और चाची नीना जैन के खिलाफ दिल्ली की एक संपत्ति में एक चौथाई हिस्सेदारी मांगी थी।

हाईकोर्ट ने कहा कि कृतिका का दावा कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है, क्योंकि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के मुताबिक, संपत्ति केवल दादा की विधवा पत्नी और संतान में ही बंटेगी। पोते-पोतियां तब तक प्रथम श्रेणी उत्तराधिकारी नहीं माने जाते, जब तक उनके माता-पिता जीवित हैं। कृतिका ने जिस संपत्ति में हिस्सेदारी मांगी थी वह उसके दादा की थी।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि 1956 के बाद से ऐसी संपत्ति संयुक्त परिवार की संपत्ति नहीं बल्कि व्यक्तिगत स्वामित्व मानी जाएगी। कोर्ट ने कहा कि यह निर्णय समाज में फैली उस भ्रांति को दूर करता है, जिसमें माना जाता था कि पोते-पोतियों का दादा-दादी की संपत्ति पर सीधा अधिकार होता है।