रुद्रपुर : करोड़ों की कथित धोखाधड़ी मामले में निचली अदालत का आदेश निरस्त, दोबारा सुनवाई के निर्देश

रुद्रपुर। करोड़ों रुपये की कथित धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश मुकेश चंद्र आर्य की अदालत ने निचली अदालत के आदेश को निरस्त करते हुए मामले की पुनः सुनवाई के निर्देश दिए हैं। अदालत ने माना कि प्रकरण में प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध के तत्व मौजूद हैं और इसे मात्र सिविल विवाद मानकर समाप्त नहीं किया जा सकता।

मामला निशांत प्रिंट पैक सॉल्यूशन प्रा. लि. के अधिकृत प्रतिनिधि सुभाष सिंह की ओर से दायर किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि मैसर्स पंजाबी प्रीफेब्रिकेटेड कंपनी के प्रोपराइटर गगनदीप सिंह और उनके पिता ने फैक्ट्री प्लांट स्थापित करने के नाम पर कंपनी से 1 करोड़ 8 लाख 56 हजार रुपये प्राप्त किए। आरोप है कि पूरी राशि लेने के बावजूद निर्धारित मशीनरी उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसके कारण परियोजना शुरू नहीं हो सकी और कंपनी को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

शिकायतकर्ता के अनुसार मामले में स्थानीय पुलिस से कार्रवाई की मांग की गई थी, लेकिन कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए जाने पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया। निचली अदालत ने वर्ष 2022 में मामले को सिविल प्रकृति का मानते हुए आवेदन खारिज कर दिया था।

इस आदेश के विरुद्ध सुभाष सिंह ने सत्र न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका दायर की। अपीलकर्ता की ओर से अधिवक्ता कमल चिलाना ने पक्ष रखते हुए तर्क दिया कि मामले में गंभीर आपराधिक तत्व मौजूद हैं और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर विधिक कार्रवाई आवश्यक है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध तथ्यों और अभिलेखों का परीक्षण करते हुए पाया कि आरोपों में आपराधिक तत्व भी शामिल हैं। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि किसी मामले में सिविल विवाद के तत्व होने मात्र से आपराधिक दायित्व स्वतः समाप्त नहीं हो जाता।

अदालत ने निचली अदालत के आदेश को तथ्यों और कानून के अनुरूप न मानते हुए निरस्त कर दिया तथा मामले में पुनः सुनवाई के निर्देश जारी किए हैं।