उत्तराखंड हाईकोर्ट ने डिप्टी जेलर और सिपाही को किया निलंबित, सचिव डीएलएसए, ऊधमसिंह नगर की रिपोर्ट पर लिया संज्ञान।

मीडिया ग्रुप, 15 जुलाई, 2025

उत्तराखंड उच्च न्यायालय नैनीताल ने ऊधमसिंह नगर जिले की सेंट्रल जेल सितारगंज में बंद विचाराधीन कैदी से मारपीट और डराने-धमकाने की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया मिले प्रमाणों के आधार पर जेल में तैनात कांस्टेबल राम सिंह कपकोटी और डिप्टी जेलर नवीन चौहान को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश दिए हैं। साथ ही आदेश दिया कि अन्य शामिल अधिकारियों के नाम भी प्रस्तुत किए जाएं।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) ऊधमसिंह नगर के सचिव योगेन्द्र कुमार सागर द्वारा 14 जुलाई 2025 को प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, 11 जुलाई को सेंट्रल जेल सितारगंज का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान कैदी सुभान से मुलाकात की गई, जो काफी डरा-सहमा और घायल अवस्था में पाया गया। उसकी आंखें लाल थीं और सूजन भी थी। शरीर पर चोट के कई निशान मौजूद थे, जिनमें से कुछ जलने जैसे प्रतीत हो रहे थे। उसकी पीठ और कंधे पर गहरे जख्म व खरोंचें भी देखी गईं।

डराने के लिए जेल कर्मियों ने किए इशारे

निरीक्षण के दौरान जब सुभान को जीयूएमटीआई (कानूनी सहायता केंद्र) में बुलाया गया, तब जेल स्टाफ के कई सदस्य बाहर खड़े होकर भयभीत करने वाले इशारे कर रहे थे। एक कांस्टेबल राम सिंह कपकोटी को अलमारी के पास डंडा पटकते हुए देखा गया, जिससे डर का माहौल बन रहा था। सचिव, DLSA ने जेल प्रशासन को इस पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। घायल कैदी ने बताया कि उसे 28 जून 2025 की दोपहर को जेल स्टाफ द्वारा पीटा गया था, लेकिन डर के कारण वह मारपीट करने वाले व्यक्ति का नाम नहीं बता सका। बाद में उसे 8 जुलाई को हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल भेजा गया, जहां उसके पिता और भाई ने उससे मुलाकात की।

सचिव, डीएलएसए की रिपोर्ट पर हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान।
मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति आलोक माहरा की खंडपीठ ने मामले का संज्ञान लेते हुए कहा कि प्रस्तुत की गई तस्वीरें स्पष्ट रूप से कैदी की चोटों की पुष्टि करती हैं। कोर्ट ने कहा कि आंख की चोट और चेहरे की सूजन सामान्य दृष्टि से भी दिखाई देती है। अदालत ने कहा कि यह मामला अत्यंत गंभीर है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। खंडपीठ ने आदेश दिया कि हम कांस्टेबल राम सिंह कपकोटी और डिप्टी जेलर नवीन चौहान को फिलहाल निलंबित करने का निर्देश देते हैं। जेल अधीक्षक उन अन्य अधिकारियों के नाम भी उपलब्ध कराएँ जो डीएलएसए सचिव द्वारा कैदी से बातचीत के समय उपस्थित थे। हम अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कारागार) को इस आदेश का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश देते हैं।