मीडिया ग्रुप, 01 अक्टूबर, 2025
लखनऊ में चुनावी रंजिश के चलते एक महिला को ग्राम प्रधान पर झूठा एससी/एसटी एक्ट का मुकदमा दर्ज कराना भारी पड़ गया। ग्राम प्रधान पर मारपीट व एससी एसटी एक्ट का फर्जी मुकदमा दर्ज कराने वाली महिला को एससी/एसटी एक्ट के विशेष न्यायाधीश विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने डेढ वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है।
आदेश की एक प्रति जिलाधिकारी लखनऊ को इस निर्देश के साथ भेजी गई है कि गुड्डी को कोई राहत धनराशि दी है, तो उसे तत्काल वापस लिया जाए। सरकारी वकील अरविंद मिश्रा ने न्यायालय को बताया कि दोषी महिला के देवर और ग्राम प्रधान महिला के पति और कुछ लोगों के बीच प्रधानी के चुनाव को लेकर विवाद चल रहा था।
इस दुश्मनी के चलते दोषी महिला ने अपने देवर के कहने पर 15 नवंबर 2024 को थाने में विपक्षियों के खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज कराया था। दोषी महिला ने आरोप लगाया था कि जब वह अपने देवर के साथ ग्राम जगदीशपुर से दवा लेकर लौट रही थी तो रास्ते में विपक्षियों ने उसे और उसके देवर को जबरन रोककर गालियां दीं और मारा-पीटा।
हालांकि, जांच में पता चला कि घटना के समय आरोपित अनूप अवस्थी फैजुल्लागंज में था और बाकी दोनों मथुरा प्रसाद के घर पर थे। एसीपी अमोल मुरकुट ने मामले की जांच की और पाया कि कोई घटना घटित नहीं हुई थी। इसके बाद विवेचक ने मामले में अंतिम रिपोर्ट लगा दी और आरोपित महिला गुड्डी के खिलाफ झूठा मुकदमा लिखाने का परिवाद न्यायालय में दाखिल किया। न्यायालय द्वारा ग्राम प्रधान के विरुद्ध झूठा एससी/एसटी एक्ट का मुकदमा दर्ज कराने वाली महिला को डेढ़ साल की सजा सुनाई है। न्यायालय ने राहत राशि वापस लेने का आदेश दिया और पंचायती राज व्यवस्था में बढ़ती दुश्मनी पर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि एससी/एसटी एक्ट का दुरुपयोग हो रहा है और झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने वालों को राहत नहीं मिलनी चाहिए।
