रुद्रपुर। कुर्मी महासभा द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज की 395वीं जयंती सुकृत एनक्लेव, शिमला बहादुर में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ उपस्थित अतिथियों एवं समाज के प्रबुद्धजनों द्वारा शिवाजी महाराज के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर श्रद्धासुमन अर्पित करने के साथ हुआ। इस अवसर पर पूरा वातावरण जय भवानी, जय शिवाजी के नारों से गूंज उठा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुर्मी महासभा के केंद्रीय अध्यक्ष सौरभ गंगवार ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज केवल एक महान शासक ही नहीं, बल्कि अदम्य साहस, स्वाभिमान और कुशल रणनीति के प्रतीक थे। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में हिंदवी स्वराज्य की स्थापना कर यह सिद्ध किया कि दृढ़ संकल्प और साहस से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।
उन्होंने युवाओं से महापुरुषों के जीवन मूल्यों से प्रेरणा लेने का आह्वान करते हुए कहा कि उनके आदर्शों पर चलकर ही राष्ट्र और समाज के उत्थान में प्रभावी योगदान दिया जा सकता है।
सौरभ गंगवार ने कुर्मी समाज की एकजुटता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि वैचारिक रूप से समाज के लोग भले ही किसी भी राजनीतिक विचारधारा से जुड़े हों, लेकिन समाज के मान-सम्मान और हितों के लिए सभी को एकजुट होकर खड़ा रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि संगठन में ही शक्ति है और समाज का सर्वांगीण विकास आपसी एकता से ही संभव है।
वहीं कुर्मी महासभा के केंद्रीय महामंत्री मनोहर लाल गंगवार ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने सर्वसमाज को साथ लेकर चलने और न्यायपूर्ण शासन का आदर्श प्रस्तुत किया। आज के समय में उनके विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। उन्होंने समाज के शैक्षणिक और आर्थिक सशक्तिकरण की आवश्यकता पर भी बल दिया तथा आने वाली पीढ़ी को गौरवशाली इतिहास से अवगत कराने की अपील की।
कार्यक्रम को संबोधित करने वाले अन्य वक्ताओं ने भी शिवाजी महाराज के सैन्य कौशल, प्रशासनिक दक्षता और उनके समावेशी दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि समाज को कुरीतियों से मुक्त कर संगठित रूप से आगे बढ़ने का संकल्प लेना ही महापुरुषों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।